दिल्ली। कतार से क्लिक तक, भारतीय रेलवे ने यात्री आरक्षण व्यवस्था को परिवर्तित कर दिया है। प्रौद्योगिकी दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक आरक्षण प्रणालियों में से एक को आज संचालित कर रही है। निरंतर आधुनिकीकरण ने बुकिंग को तेज और अधिक विश्वसनीय बना दिया है। आधुनिक यात्री आरक्षण प्रणाली एक स्मार्ट और अधिक सहज यात्रा अनुभव महसूस करा रही है।
रेलवे आरक्षण की रीढ़
भारतीय रेलवे (आईआर) दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क से हर दिन लाखों यात्रियों को जोड़ता है। यात्रा चाहे काम के सिलसिले में हो या शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, व्यवसाय या परिवार के लिए हो, यात्रीगण अपनी यात्रा की योजना बनाने के लिए विश्वसनीय आरक्षण इकोसिस्टम पर निर्भर होते हैं। प्रत्येक आरक्षित टिकट के पीछे यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) है, जो लगभग चार दशकों से रेलवे बुकिंग की प्रौद्योगिकी-आधारित रीढ़ है। पीआरएस को 1986 में पेश किया गया था और इसने मैन्युअल आरक्षण काउंटरों की जगह लेने से लेकर ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को कामयाब बनाने तक का सफर तय किया है।
जैसे-जैसे उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ी और ऑनलाइन संस्कृति ने जोर पकड़ा, वैसे-वैसे तेज और अधिक विश्वसनीय और बिना बाधा वाली बुकिंग सुविधाओं की आकांक्षा भी बढ़ी। पीक बुकिंग अवधि, विशेष रूप से तत्काल आरक्षण के दौरान, मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे मूल रूप से एक अलग समय के लिए डिज़ाइन किए गए बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ जाता है। इन बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए, भारतीय रेलवे पीआरएस का व्यापक आधुनिकीकरण कर रहा है। नया पीआरएस बुकिंग क्षमता को बढ़ाएगा, यात्री-केंद्रित सुविधाओं को पेश करेगा और एक व्यापक ऑनलाइन बुनियादी ढांचा तैयार करेगा।
यात्री आरक्षण प्रणाली के चार दशक
पीआरएस एक कम्प्यूटरीकृत प्लेटफॉर्म है जो भारतीय रेलवे नेटवर्क पर आरक्षित टिकट व्यवस्था का प्रबंधन करता है। यह यात्रियों को आरक्षित टिकट बुक करने, संशोधित करने और रद्द करने की सुविधा उपलब्ध कराता है। यह सीट आवंटन, प्रतीक्षा सूची, टिकट रद्द करने के एवज में आरक्षण (आरएसी) की व्यवस्था संभालने के साथ-साथ आरक्षण चार्ट और यात्री पूछताछ का भी प्रबंधन करता है। आरक्षण केंद्रों और ऑनलाइन बुकिंग प्रणालियों को जोड़कर, पीआरएस ने रेलवे आरक्षण को अधिक कुशल, पारदर्शी और सुलभ बना दिया है।
पीआरएस ने मैन्युअल आरक्षण रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग को इलेक्ट्रॉनिक सेटअप के जरिये बदल दिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, पीआरएस एक राष्ट्रव्यापी आरक्षण प्लेटफार्म के रूप में विकसित हो गया। इसने यात्रियों को एक ही स्थान से देश भर की ट्रेनों के लिए टिकट बुक करने में सक्षम बनाया। पीआरएस अब काउंटरों, वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराता है। यात्रीगण ऑनलाइन आरक्षण के लिए, भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पीआरएस तक पहुंचते हैं। यह यात्रियों को एक सहज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कहीं से भी आरक्षित टिकट बुक करने की सुविधा उपलब्ध कराता है।
पीआरएस ने मैन्युअल आरक्षण रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से बदल दिया। जैसे जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, पीआरएस कंप्यूटरीकृत उन्नत आरक्षण और टिकटिंग के लिए देशव्यापी नेटवर्क (सीओएनसीईआरटी) के जरिये एक राष्ट्रव्यापी आरक्षण प्लेटफार्म के रूप में विकसित हो गया। इसने यात्री को किसी भी संबद्ध आरक्षण केंद्र से देश भर की ट्रेनों के लिए टिकट बुक करने में सक्षम बना दिया, चाहे ट्रेन की शुरुआत या गंतव्य कुछ भी हो। समय के साथ, बुकिंग की सुविधा आरक्षण काउंटरों से आगे बढ़कर वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन तक विस्तारित हो गयी। आज, यात्री भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ऑनलाइन पीआरएस का उपयोग करते हैं, जिससे कहीं से भी आरक्षित टिकट बुकिंग संभव हो जाती है।
पीआरएस के विकास में प्रमुख मील के पत्थर
वर्ष – मील के पत्थर
1986 – भारत में पीआरएस लागू, जिससे कम्प्यूटरीकृत रेलवे आरक्षण की शुरुआत हुई।
1990s – पीआरएस नेटवर्क का विस्तार रेलवे के अलग-अलग जोन में हुआ , जिससे एक इंटरकनेक्टेड राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से आरक्षण संभव हुआ।
2002 – इंटरनेट-आधारित टिकट बुकिंग की शुरुआत की गई जिससे आरक्षण सेवाएं काउंटरों से आगे विस्तारित हो गयीं।
2014 – ऑनलाइन बुकिंग क्षमता और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अगली पीढ़ी की ई-टिकटिंग (एनजीईटी) प्रणाली शुरू की गई।
2025 – रेलवन ऐप लॉन्च किया गया। सरकार ने उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हुई बुकिंग और पूछताछ क्षमता के साथ अगली पीढ़ी के पीआरएस के विकास की घोषणा की है।
अगस्त 2026 – उन्नत पीआरएस में ट्रेनों का चरणबद्ध स्थानांतरण शुरू हो गया है, जो रेलवे आरक्षण के डिजिटल परिवर्तन में एक नए चरण का प्रतीक है।
इन पहलों से पारदर्शिता और परिचालन दक्षता में सुधार हुआ।
पीआरएस: एक विस्तारित डिजिटल प्लेटफॉर्म
जून 2025 और जून 2026 के दौरान यात्रियों ने पीआरएस के माध्यम से 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। यह रेल यात्रियों द्वारा डिजिटल सेवाओं को तेजी से अपनाने का प्रतीक है।
वर्तमान में, पीआरएस दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रेलवे बुकिंग प्लेटफार्मों में से एक है। इसे रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) ने विकसित किया है और यही इसका रखरखाव करता है। यह कई बुकिंग चैनलों के माध्यम से हर दिन 20.5 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान करता है। लगभग 73 प्रतिशत पीआरएस लेनदेन कैशलेस हैं। पीआरएस भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक ऑनलाइन प्लेटफार्मों में से एक के रूप में विकसित हुआ है।
डिजिटल इंडिया की जरूरतों का समाधान
भारतीय रेलवे को अपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, एक ऐसी बुकिंग प्रणाली की आवश्यकता है जो तेज, अधिक विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित सेवाएं प्रदान करते हुए बड़े पैमाने पर लेनदेन को संभालने में सक्षम हो।
आरक्षण इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए, भारतीय रेलवे ने कई यात्री-केंद्रित सुधार शुरू किए:
* अग्रिम आरक्षण अवधि (एआरपी) यात्री बुकिंग पैटर्न के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के लिए 120 दिन से घटाकर 60 दिन कर दी गई।
* आधार-प्रमाणीकृत तत्काल बुकिंग निष्पक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए जुलाई 2025 से शुरू की गई।
* स्वचालित बॉट और अनधिकृत एजेंटों द्वारा दुरुपयोग को रोकने के लिए बाद में ओटीपी-आधारित सत्यापन जोड़ा गया। मौजूदा पीआरएस को 2010 में इटेनियम सर्वर और ओपनवीएमएस प्लेटफॉर्म पर शुरू किया गया था। इसे डिजिटल मांग के एक अलग पैमाने के लिए डिजाइन किया गया था। अब इसे क्लाउड-आधारित, अगली पीढ़ी की आरक्षण प्रणाली में अपग्रेड किया जा रहा है।
उन्नत पीआरएस उपलब्ध करायेगा:
* मौजूदा सेटअप के तहत 32,000 की तुलना में प्रति मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग।
* प्रति मिनट 40 लाख से अधिक पूछताछ, इस समय 4 लाख से अधिक है।
* बुकिंग और पूछताछ के लिए एक बहुभाषी, उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस।
* भविष्य में यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अधिक विस्तारित, लचीलापन और विश्वसनीयता ।
यात्री सुविधाओं को भी फिर से डिज़ाइन की गई आईआरसीटीसी वेबसाइट के माध्यम से बेहतर किया जा रहा है। जुलाई 2026 में लॉन्च किया गया बीटा संस्करण, एक सरल इंटरफ़ेस, बुकिंग के लिए कम स्टेप और सभी क्लास में सीट की उपलब्धता की सुविधा देता है। नए पोर्टल को अगली पीढ़ी के पीआरएस के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे बुकिंग का अनुभव बेहतर हो जाएगा।
रेलवे टिकटिंग के अलावा, आईआरसीटीसी अपने प्लेटफार्म के माध्यम से यात्रा-संबंधी सेवाएं भी प्रदान करता है, जिसमें होटल बुकिंग, रिटायरिंग रूम, लाउंज बुकिंग, टूर पैकेज, फ्लाइट टिकट और बस टिकट शामिल हैं।
सीआरआईएस: रेलवे प्रौद्योगिकी को संचालित करने वाला संस्थान
1986 में स्थापित, रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) भारतीय रेलवे के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधी बुनियादी ढांचे की डिजाइन, उसका विकास और रखरखाव करता है। लगभग चार दशकों में, सीआरआईएस ने रेलवे बुकिंग को कम्प्यूटरीकृत करने से लेकर एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने तक विस्तार किया है। इस समय यह प्रतिदिन लाखों यात्रियों और रेलवे कर्मियों को समाधान देकर उनकी सहायता प्रदान करता है।
यात्री-केंद्रित डिजिटल सेवाएं
सीआरआईएस ने पीआरएस सहित कई प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जिन्होंने यात्रियों के भारतीय रेलवे के साथ संवाद के तरीके को बदल दिया है।
*अनारक्षित टिकट प्रणाली (यूटीएस):* अनारक्षित यात्रा के लिए पेपरलेस और मोबाइल टिकटिंग का समर्थन करता है।
*राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस):* वास्तविक समय में ट्रेन के चलने की स्थिति, कार्यक्रम और आगमन या प्रस्थान की जानकारी प्रदान करती है।
*रेलकनेक्ट:* 2017 में शुरू रेलकनेक्ट मोबाइल एप्लिकेशन पीआरएस सेवाएं स्मार्टफोन में लेकर आया। इसने ऑनलाइन टिकट बुकिंग, टिकट रद्द करने और पीएनआर पूछताछ को संभव बनाया।
*रेलवन:* जुलाई 2025 में शुरू रेलवन एक एकीकृत मोबाइल एप्लिकेशन है। रेलवन कई कार्यों को एक एकीकृत इंटरफ़ेस में जोड़ता है, जिससे रेलवे सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाती है। इस एप्लिकेशन ने एंड्रॉइड और आईओएस डिवाइसों पर (22 जुलाई तक) 4.55 करोड़ से अधिक डाउनलोड दर्ज किए हैं। इस समय यह हर दिन लगभग 9.65 लाख टिकट बुकिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है। इसकी नवीनतम विशेषताओं में से एक एआई-आधारित प्रतीक्षा सूची पुष्टिकरण भविष्यवाणी है। यह यात्रा से पहले प्रतीक्षा सूची वाले टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है, यहां तक कि टिकट बुक करते समय भी। पूर्वानुमान के सटीक होने की संभावना 53 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जिससे यात्रियों को बेहतर सूचना के साथ यात्रा निर्णय लेने में मदद मिली है।
*रेलमदद:* यात्री शिकायतों, फीडबैक और सेवा अनुरोधों के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करता है। यात्री रेलमदद वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन, एसएमएस और रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म समय पर शिकायत के समाधान के लिए स्वचालित शिकायत असाइनमेंट और ऑटो-एस्केलेशन का उपयोग करता है। पिछले तीन वर्षों के दौरान हल की गई शिकायतों का विवरण:
वर्ष – हल की गई शिकायतों का प्रतिशत
2023-2024 – 99.98 प्रतिशत
2024-2025 – 99.99 प्रतिशत
2025-2026 – 99.98 प्रतिशत
* *कोचमित्र:* यात्रियों को ट्रेन में उनकी यात्रा के दौरान हाउसकीपिंग और सहायता जैसी सुविधाओं का अनुरोध करने में मदद करता है।
* *रेल सुगम:* रेलवे सेवाओं, माल ढुलाई और यात्री संबंधी सुविधाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
* *रेल राजभाषा:* डिजिटल उपकरणों के माध्यम से रेलवे प्रशासन में हिंदी के उपयोग का समर्थन करता है।
रेलवे परिचालन में सहायक प्रौद्योगिकी
यात्री सेवाओं से परे, सीआरआईएस ने डिजिटल सिस्टम विकसित किया है जो रेलवे दक्षता में सुधार करता है।
* *माल परिचालन सूचना प्रणाली (एफओआईएस):* माल ढुलाई, वैगन प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स योजना को डिजिटल बनाती है।
* *क्रू प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस):* क्रू शेड्यूलिंग, तैनाती और निगरानी को सुव्यवस्थित करता है।
* *ई-दृष्टि:* रेलवे प्रदर्शन और परिचालन संकेतकों की निगरानी के लिए डैशबोर्ड प्रदान करता है।
* *आपूर्ति:* खरीद और निविदा प्रबंधन प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाता है।
* *चालक दल और हैंड-हेल्ड टर्मिनल:* क्षेत्र संचालन, निरीक्षण और वास्तविक समय की निगरानी में सहायता करते हैं।
*नयी प्रौद्योगिकियों को अपनाना*
सीआरआईएस उन्नत डिजिटल समाधानों के माध्यम से रेलवे प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण जारी रखे हुए है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), बिग डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग को अपना रहा है। यह रेलवे एप्लीकेशन में ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और ऑगमेंटेड/वर्चुअल रियलिटी (एआर/वीआर) को भी अपना रहा है।
इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है:
* ट्रेन की देरी और प्रतीक्षा सूची टिकटों के कन्फर्मेशन की भविष्यवाणी के दौरान।
* ट्रेन मार्गों और समय सारिणी को बेहतर बनाने के दौरान।
* ऊर्जा खपत के पूर्वानुमान के दौरान।
* रेलवे परिसंपत्तियों के पूर्वानुमानित रखरखाव के दौरान।
* योजना और परिचालन निर्णय लेने में सुधार के दौरान।
अगली पीढ़ी का पीआरएस इसी तकनीकी आधार पर बना है। यह तेज़, स्मार्ट और अधिक विस्तारित आरक्षण प्लेटफ़ॉर्म बनाने के लिए उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ क्लाउड-आधारित बुनियादी ढांचे को जोड़ता है।
भविष्य के लिए तैयार आरक्षण संबंधी इकोसिस्टम
यात्री आरक्षण प्रणाली लगभग चार दशकों में भारतीय रेलवे के डिजिटल परिवर्तन को दर्शाती है। आज, यह देश भर में लाखों यात्रियों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक विश्वसनीय आरक्षण प्लेटफार्म है। अगली पीढ़ी का पीआरएस इसी मजबूत नींव पर बना है। ये सब मिलकर तेज़, अधिक विश्वसनीय और बाधा रहित रेलवे सेवाएं उपलब्ध करायेंगे। जैसे-जैसे यात्रियों की जरूरतें बढ़ती जा रही हैं, भारतीय रेलवे भविष्य के लिए तैयार आरक्षण संबंधी इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है।